Class 8th third language Hindi Test book Solution

वृक्षप्रेमी तिम्मक्का – 8 वीं कक्षा की तीसरी भाषा हिंदी पाठ्यपुस्तक प्रश्नावली

 
 वृक्षप्रेमी तिम्मक्का

अभ्यास
I. एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

1. गुब्बी तालुका (तहसील) किस जिले में स्थित है?
उत्तर: गुब्बी तालुका तुमकूर जिले में स्थित है।
2. तिम्मक्का के माँ-बाप अपना पेट कैसे पालते थे?
उत्तर: तिम्मक्का के माँ-बाप मेहनत-मजदूरी करते हुए अपना पेट पालते थे।
3. चिक्कय्या क्या काम करते थे?
उत्तर: चिक्कय्या रोज दूसरों के खेत में काम करते थे।
4. एक दिन चिक्कय्या और तिम्मक्का ने मज़दूरी नहीं की तो परिणाम क्या होता था?
उत्तर: चिक्कय्या और तिम्मक्का ने एक दिन मजदूरी नहीं की तो उन्हें उस दिन भूखे रहना पड़ता था।
5. जानवरों के लिए तिम्मक्का दंपति ने क्या इंतज़ाम किया?
उत्तर: मेले में आनेवाले जानवरों के लिए तिम्मक्का दंपति ने पीने के पानी का इंतजाम किया।
6. तिम्मक्का दंपति ने बरगद के डाल कहाँ लगाये?
उत्तर: तिम्मक्का दंपति ने हुलिकल और कुदूर के बीच चार कि.मी. के रास्ते के दोनों ओर बरगद के डाल लगाये।
7. पर्यावरण संरक्षण के साथ तिम्मक्का और कौन सा काम कर रही हैं?
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण के साथ तिम्मक्का अन्य सामाजिक कार्य भी कर रही हैं।
8. तिम्मक्का दीन-दलितों की सेवा के लिए क्या समर्पित कर रही हैं?
उत्तर: तिम्मक्का दीन-दुखियों की सेवा के लिए जो भी धनराशि पुरस्कार को समर्पित कर रही हैं
9. तिम्मक्का जी किस क्षेत्र में एक मिसाल हैं?
उत्तर: तिम्मक्का जी समाज-सेवा के क्षेत्र में एक मिसाल है।
10. तिम्मक्का के माता-पिता का नाम क्या है?
उत्तर: तिम्मक्का के पिता चिक्करंगय्या और माता विजयम्मा है।

11. तिम्मक्का और चिक्कय्या ने क्या निश्चय किया?
उत्तर: तिम्मक्का और चिक्कय्या ने अपने आप को किसी धर्म” कार्य में लगाने का निश्चय किया।
12. कर्नाटक सरकार ने किस कार्य का बीड़ा उठाया है?
उत्तर: कर्नाटक सरकार ने तिम्मक्का द्वारा लगाए गए पेड़ों की रक्षा करने का बीड़ा उठाया है।

13. तिम्मक्का दंपति किस के लिए तरसते थे?
उत्तर: तिम्मक्का दंपति बच्चे के लिए तरसते थे।
14. उमेश बी.एन. कहाँ के रहनेवाले थे?
उत्तर: उमेश बी.एन. बल्लूरु के रहनेवाले थे।
15. चिक्करंगय्या और विजयम्मा दंपति को कितनी संतान थी?
उत्तर: चिक्करंगय्या और विजयम्मा दंपति को छः संतान थी।
16. श्रीमती तिम्मक्का ने अपने पति की याद में क्या संकल्प लिया है?
उत्तर: तिम्मक्का ने अपने पति की याद में हुलिकल ग्राम में गरीबों की निःशुल्क चिकित्सा के लिए एक अस्पताल के निर्माण कराने का संकल्प किया है।
17. तिम्मक्का ने अस्पताल निर्माण का संकल्प क्यों किया?
उत्तर: अपने पति के याद में हुलिकल ग्राम के गरीबों की निःशुल्क चिकित्सा के लिए तिम्मक्का ने अस्पताल निर्माण का संकल्प किया।
II. दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

1. तिम्मक्का दंपति किस प्रकार के धर्म-कार्य में लग गये?
उत्तर: तिम्मक्का और चिक्कय्या दोनों ने निश्चय किया की अपने आप को किसी धर्म-कार्य में लगा ले। उनके गाँव के पास ही श्रीरंगस्वामी का मंदिर था। वहाँ हर साल मेला लगता था। वहाँ आनेवाले जानवरों के लिए पीने के पानी का इंतजाम किया। रास्ते के दोनों ओर पेड़ लगाये।

2. तिम्मक्का ने बरगद के डालों को कैसे पाला-पोसा?
उत्तर: तिम्मक्का ने हुलिकल और कुदूर के बीच के रास्ते के दोनों ओर बरगद के डाल लगाये। बरगद के पेड़ों को पानी सींचकर तथा उन पेड़-पौधों को भेड़-बकरियों से रक्षा करते हुए उनका पालन-पोषण किया।
3. तिम्मक्का के जीवन में कैसी मुसीबत आ गई?
उत्तर: तिम्मक्का के पति की तबीयत बिगड़ गई और वे चल बसे। तिम्मक्का अब अकेली पड़ गई।
4. तिम्मक्का ने क्या संकल्प किया है?
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ तिम्मक्का अन्य सामाजिक कार्य भी कर रही हैं। अपने पति की याद में उन्होंने हुलिकल ग्राम में गरीबों की निःशुल्क चिकित्सा के लिए एक अस्पताल के निर्माण कराने का संकल्प किया है। जो भी धनराशि पुरस्कार के रूप में तिम्मक्का को मिली है, उसे वह सामाजिक कार्य तथा दीन-दलितों की सेवा के लिए अर्पित कर रही हैं।

5. बच्चे को गोद लेने के कारण तिम्मक्का दंपति को दुःख भोगना पड़ा। क्यों?
उत्तर: तिम्मक्का निःसंतान थी। पति-पत्नी बच्चों के लिए तरस रहे थे। अंत में उन्होंने एक बच्चे को गोद लिया। दत्तक पुत्र के सगे माँ-बाप को लोगों की कटु निंदा सुननी पड़ी। उन्होंने अपने बेटे को वापस ले लिया। अपना दत्तक पुत्र खोकर तिम्मक्का बहुत दुःखी हुई।
6. पर्यावरण संरक्षण में तिम्मक्का का क्या योगदान है?
अथवा
तिम्मक्का “पर्यावरण प्रेमी’ है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण के लिए ही तिम्मक्का ने अपना सारा जीवन बिता दिया। उन्होंने हुलिकल और कुदूर के बीच के चार कि.मी. के रास्ते के दोनों ओर बरगद के डाल लगाये। उन्हें अपने बच्चों की तरह प्रेम से पाला-पोसा। यह काम निरंतर दस सालों तक चलता रहा। पेड़ राहगीरों को छाया देने के साथ-साथ, पक्षियों के आश्रयधाम भी बन गए। अब तक 300 से भी अधिक पेड़ लगाकर तिम्मक्का ने बहुत बड़ा कार्य किया है।
7. तिम्मक्का को किन-किन पुरस्कारों से अलंकृत किया गया है?
उत्तर: तिम्मक्का को उनकी निष्ठा, त्याग और सेवा के लिए नाडोज पुरस्कार, राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार, इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष-मित्र, वीर-चक्र, कर्नाटक कल्पवल्ली, गाड़फ्री फिलिप्स धैर्य पुरस्कार, विशालाक्षी पुरस्कार, डॉ. कारंत पुरस्कार, कर्नाटक सरकार के महिला और शिशु कल्याण विभाग द्वारा सम्मान-पत्र आदि पुरस्कारों से अलंकृत किया गया है।
III. रिक्त स्थान भरिए :
1. तिम्मक्का का जन्म ___________ गाँव में हुआ था।
2. तिम्मक्का के माँ-बाप ___________ करते हुए अपना पेट पालते थे।
3. तिम्मक्का के पति का नाम _________ था।
4. उनके गाँव के पास __________ का मंदिर था।
5. तिम्मक्का ने पेड़ों को ____________ से रक्षा करने की व्यवस्था की।
उत्तरः
1. कक्केनहल्ली;
2. मेहनत-मजदूरी;
3. चिक्कय्या;
4. श्रीरंगस्वामी;
5. भेड़-बकरियों।
IV. वाक्य में प्रयोग कीजिए :
1. मिसाल – ____________
2. मेहनत-मजदूरी – ___________
3. पसीना बहाना – ___________
4. धर्म-कार्य – ____________
5. तबीयत – ____________
6. मुसीबत – ____________
उत्तर:
1. मिसाल – तिम्मक्का आदर्श व्यक्तित्व की अच्छी मिसाल हैं।
2. मेहनत-मजदूरी – तिम्मक्का के माँ-बाप मेहनत-मजदूरी करके अपना पेट पालते थे।
3. पसीना बहाना – पसीना बहाने से अवश्य फल मिलता है।
4. धर्म-कार्य – हमें कोई भी धर्म-कार्य पूर्ण निष्ठा एवं निःस्वार्थ भाव से करना चाहिए।
5. तबीयत – यदि तबीयत ठीक होगी, तो सबकुछ ठीक होगा।
6. मुसीबत – मुसीबत में धैर्य नहीं खोना चाहिए।
 
ಮರ – ಮರ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ಸಾರಾಂಶ:

(ಈ ಪಾಠದಲ್ಲಿ ಸಾಲುಮರದ ತಿಮ್ಮಕ್ಕನ ಅಮೂಲ್ಯ ಪರಿಸರ ಪ್ರೇಮದ ಪರಿಚಯ ನೀಡಲಾಗಿದೆ.
ಇದರಿಂದ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳಲ್ಲಿ ಪರಿಸರ ರಕ್ಷಣೆ ಮಾಡಲು ತಮ್ಮ ನಿಷ್ಠ ಪೂರ್ಣ ಸಹಯೋಗವನ್ನು ತೋರಿಸುವರು.)
ಸಾಲುಮರದ ತಿಮ್ಮಕ್ಕನ ಹೆಸರು ಇಂದು ಕರ್ನಾಟಕದ ಮೂಲೆ ಮೂಲೆಗಳಲ್ಲಿ ಹರಡಿದೆ. ಕರ್ನಾಟಕದ ಸರ್ಕಾರವು ಅವಳನ್ನು ಎಷ್ಟು ಪುರಸ್ಕಾರಗಳಿಂದ ಗೌರವಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಸಮಾಜದ ಸೇವೆಯ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಈ ಮಹಿಳೆಯು ಒಬ್ಬ ಮಾದರಿಯಾಗಿರುವಳು.

ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಜನಿಸಿದ್ದು ತುಮಕೂರು ಜಿಲ್ಲೆಯ ಗುಬ್ಬಿ ತಾಲೂಕಿನ ಕಕ್ಕೆನಹಳ್ಳಿ ಎಂಬ ಚಿಕ್ಕ ಗ್ರಾಮದಲ್ಲಿ. ತಂದೆ ಚಿಕ್ಕ ರಂಗಯ್ಯ ಮತ್ತು ತಾಯಿ ವಿಜಯಮ್ಮ ಅವರ ಹಾರು ಮಕ್ಕಳಲ್ಲಿ ತಿಮ್ಮಕ್ಕ ಒಬ್ಬಳು ಅವಳ ತಂದೆ ತಾಯಿ ದಿನಗೂಲಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡು ಜೀವಿಸುತ್ತಿದ್ದರು.

ತಿಮ್ಮಕ್ಕನ ಗಂಡನ ಹೆಸರು ಬಿಕ್ಕಲಾ ಚಿಕ್ಕಯ್ಯ ಎಂದು ಅವನು ಆಶಿಕ್ಷಿತನಾಗಿದ್ದನು. ಬೇರೆಯವರ ಹೊಲದಲ್ಲಿ ಬೆವರು ತೋರಿಸಿ ಜೀವಿಸುತ್ತಿದ್ದನು. ಈ ದಂಪತಿಗಳು ತುಂಬಾ ಕಷ್ಟಪಟ್ಟು ಜೀವನ ನಡೆಸುತ್ತಿದ್ದರು. ಆದಾಯ ತುಂಬಾ ಕಡಿಮೆ. ಒಂದು ದಿನ ಕೆಲಸ ಮಾಡದಿದ್ದರೆ ಅವರು ಉಪವಾಸ ಇರಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ತಿಮ್ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಸಂತತಿ ಇರಲಿಲ್ಲ. ಮಕ್ಕಳಾಗಬೇಕೆಂದು ಪತಿ ಪತ್ನಿಯರಿಬ್ಬರೂ ತುಂಬಾ ಹಾತೊರೆಯುತ್ತಿದ್ದರು. ಕೊನೆಗೆ ಅವರು ಒಂದು ಮಗುವನ್ನು ದತ್ತು ತೆಗೆದುಕೊಂಡರು. ಮಗುವಿನ ತಂದೆ ತಾಯಿಯನ್ನು ಅವರ ಈ ನಿರ್ಣಯಕ್ಕಾಗಿ ಸಂಬಂಧಿಕರು ಅವರ ಮೇಲೆ ದೋಷಾರೋಪಣೆ ಮಾಡಿದರು. ಆದ್ದರಿಂದ ಅವರು ದತ್ತುವನ್ನು ರದ್ದುಗೊಳಿಸಿದ್ದರು. ದತ್ತು ಮಗುವನ್ನು ಕಳೆದುಕೊಂಡು ತಿಮ್ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ತುಂಬಾ ನೋವಾಯಿತು. 2005ರಲ್ಲಿ ಅವರು ಬಳೂರು ಎಂಬ ಊರಿನ ಉಮೇಶ್ ಬಿಎಸ್ ಎಂಬುವವರನ್ನು ದತ್ತು ತೆಗೆದುಕೊಂಡರು.

ಯಾವತ್ತೂ ಧರ್ಮ ಕಾರ್ಯದಲ್ಲಿ ತೊಡಗಬೇಕೆಂದು ಪತಿ-ಪತ್ನಿಯವರಿಬ್ಬರು ನಿರ್ಣಯಿಸಿದ್ದರು. ಅವರ ಹೂರ ಸಮೀಪ ಶ್ರೀರಂಗ ಸ್ವಾಮಿ ದೇವಾಲಯ ಇತ್ತು. ಮತ್ತು ಅಲ್ಲಿ ಪ್ರತಿ ವರ್ಷ ಜಾತ್ರೆ ನಡೆಯುತ್ತಿತ್ತು. ಇವರು ಅಲ್ಲಿ ಬರುತ್ತಿದ್ದ ಪ್ರಾಣಿಗಳಿಗೆ ಕುಡಿಯುವ ನೀರು ಪೂರೈಸುವ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಮಾಡಿದರು, ರಸ್ತೆಯ ಪಕ್ಕದಲ್ಲಿ ಸಸಿಗಳನ್ನು ನೆಟ್ಟು ಅವುಗಳನ್ನು ಬೆಳೆಸಬೇಕೆಂದು ತಿಮ್ಮಕ್ಕಳ ತಲೆಯಲ್ಲಿ ಒಂದು ವಿಚಾರವೂ ಒಳೆಯಿತು. ಇದೇನು ಸರಳವಾದ ಕೆಲಸವಾಗಿರಲಿಲ್ಲ. ಆದರೂ ಸಹ ಅವಳು ಹುಲಿಕಲ್ ಮತ್ತು ಕುದೂರು ನಡುವಿನ ನಾಲ್ಕು ಕಿಲೋಮೀಟರ್ ಉದ್ದದ ಪಕ್ಕದಲ್ಲಿ ಸಸಿಗಳನ್ನು ನೆಟ್ಟಳು. ಅವುಗಳನ್ನು ಆಡುಗಳು ಮತ್ತು ಕುರಿಗಳು ತಿನ್ನದೆ ರಕ್ಷಿಸಿದ್ದಳು. ಮೊದಲನೇ ವರ್ಷ 10, ಎರಡನೆಯ ವರ್ಷ 15, ಮತ್ತು ಮೂರನೇ ವರ್ಷ 90 ಸಸಿಗಳನ್ನು ನೆಟ್ಟಳು. ಅವುಗಳನ್ನು ತನ್ನ ಮಕ್ಕಳಂತೆ ಸಾಕಿ ಸಲಹೆಗಳು. ಈ ಕಾರ್ಯವು ನಿರಂತರ ಹತ್ತು ವರ್ಷಗಳ ತನಕ ನಡೆಯಿತು. ಈ ಮರಗಳು ದಾರಿ ಹೋದವರಿಗೆ ನೆರಳು ನೀಡುವುದರೊಂದಿಗೆ ಪಕ್ಷಿಗಳಿಗೆ ಆಶ್ರಯ ಸ್ಥಾನವು ಆಯ್ತು.

ಅವಳು 300ಕ್ಕಿಂತಲೂ ಹೆಚ್ಚು ಮರಗಳನ್ನು ಬೆಳೆಸಿರುವಳು. ಈಗ ಸರಕಾರವು ಅವುಗಳನ್ನು ರಕ್ಷಿಸಲು ವಹಿಸಿಕೊಂಡಿದೆ. ಈ ದಾರಿಯನಿಷ್ಠೆ, ತ್ಯಾಗ ಮತ್ತು ಸೇವಾ ಭಾವಕಾಗಿ ಅನೇಕ ಪುರಸ್ಕಾರಗಳು ಲಭಿಸಿವೆ. ಅವು ನಾಡೋಜ ಪುರಸ್ಕಾರ, ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ನಾಗರಿಕರ ಪುರಸ್ಕಾರ, ಇಂದಿರಾ ಪ್ರಿಯದರ್ಶಿನಿ ವೃಕ್ಷ ಮಿತ್ರ, ವೀರ ಚಕ್ರ ಕರ್ನಾಟಕ ಕಲ್ಲದಲ್ಲಿ, ಗಾಡ್ವಿ ಫಿಲಂ ಧೈರ್ಯ ಪುರಸ್ಕಾರ, ವಿಶಾಲಾಕ್ಷಿ ಪುರಸ್ಕಾರ, ಡಾ. ಕೊರಂಟೈನ್ ಪುರಸ್ಕಾರ ಮಹಿಳಾ ಮತ್ತು ಶಿಶು ಕಲ್ಯಾಣ ಇಲಾಖೆಯ ಮಾನ ಪತ್ರ ಹೀಗೆ ಅದೆಷ್ಟೋ ಪುರಸ್ಕಾರಗಳು ಲಭಿಸಿದೆ. 2012ರಲ್ಲಿ ಪ್ರಥಮ ಬಾರಿ ನಡೆದ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಪರ್ಯಾವರಣ ಸಮ್ಮೇಳನದ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿದ್ದಳು.

ಕಡುಬಡತನದಲ್ಲಿ ಜೀವಿಸಿದ್ದರೂ ಅದ್ಭುತ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ ತಿಮ್ಮಕ್ಕಳ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವವು ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಆದರ್ಶವಾಗಿದೆ. ಸರ್ಕಾರದ ಸಹಾಯವಿರದೆಯೂ ಒಬ್ಬ ವ್ಯಕ್ತಿಯ ಅತ್ಯಂತ ದೊಡ್ಡ ಕೆಲಸ ಮಾಡಬಹುದು ಎಂಬುದನ್ನು ಅವಳು ತೋರಿಸಿ ಕೊಟ್ಟಿರುವಳು.

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