Class 8th third language Hindi Test book Solution

महात्मा गांधी – 8 वीं कक्षा की तीसरी भाषा हिंदी पाठ्यपुस्तक प्रश्नावली

 

 
 महात्मा गांधी 

I. एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

1. सारे देश ने गांधीजी को क्या माना?
उत्तरः सारे देश ने गांधीजी को राष्ट्रपिता माना ।
2. भारत किसके प्रयत्न से आज़ाद हुआ?
उत्तरः भारत महात्मा गाँधीजी के प्रयत्न से आज़ाद हुआ ।
3. गाँधीजी किसकी मूर्ति थे?
उत्तरः गाँधीजी त्याग और तपस्या की मूर्ति थे ।

4. गाँधीजी का स्वभाव कैसा था?
उत्तरः गाँधीजी का स्वभाव शर्मीले थे ।
5. शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल क्यों आये ?
उत्तरः शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल के निरीक्षण के लिए आये।

6. गाँधी के भाई ने कितने रूपये कर्ज लिये थे?
उत्तर: गाँधी के भाई ने पच्चीस रूपया कर्ज लिये थे।
7. गाँधीजी ने पिता से क्या माँगी ?
उत्तरः गाँधीजी ने पिता से सज़ा माँगी

II. दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

1. गाँधीजी पर नाटकों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तरः गांधीजी ने ‘श्रवण पित्रभक्ति’ और ‘हरिश्चन्द्र’ जैसे नाटकों को पढ़ और देखकर निश्चय किया कि उन्हें भी श्रवणकुमार, हरिश्चन्द्र की तरह संकट सहकर भी सच्चाई का पालन करना चाहिए। बचपन के उस सत्य-प्रेम ने ही उन्हें सत्य-तपस्वी बनाया।
2. गांधीजी की सत्य-प्रियता कहाँ से शुरू हुई? कैसे ?
उत्तरः गांधीजी की सत्य-प्रियता यहीं से शुरू हुई जब एक दिन शिक्षा अधिकारी ने निरीक्षण के समय कुछ बच्चों से अंग्रेजी के पाँच शब्द लिखवाये। उनमें से एक शब्द था ‘केटल’। बालक गांधी ने इसके हिज्जे गलत लिखे। तभी अध्यापक ने इशारे से दूसरे लड़के के हिज्जे देखकर ठीक कर लेने के लिए कहा। गांधीजी ने ऐसा नहीं किया जिसके कारण उन्हें बुद्धू माना गया। इस बात का इन्हें बुरा नहीं लगा बल्कि इस बात की खुशी हुई कि उन्होंने चोरी का रास्ता नहीं अपनाया।
3. पिता से गांधीजी के माफी माँगने के प्रसंग का वर्णन कीजिए।
उत्तरः गांधीजी के भाई ने पच्चीस रुपये कर्ज लिये थे, जिसे चुकाने के लिए भाई के हाथ के कड़े से एक तोला सोना कटवा दिया था। गांधी जी को इस बात का बहुत दुख हुआ। पिता से माफी माँगने की बात सोची लेकिन सामना करने की हिम्मत नहीं हुई। फिर सारी घटना पत्र में लिखकर पिता से माफी मांगी। पत्र पढ़कर पिता की आँखे भर आयी। यह देखकर गाँधी को विश्वास हो गया कि उन्होंने मुझे क्षमा कर दिया। उसी दिन से गांधीजी ने हमेशा के लिए चोरी की आदत छोड़ दी।
III. अनुरूप शब्द लिखिए :

1. श्रवण : पितृभक्ति : : हरिश्चन्द्र : ………………
2. माफी : क्षमा : : दंड : …………….
3. तिरंगा झंडा : राष्ट्रध्वज : : गांधीजी : ………………..
4. सच्चाई : सम्मान : : चोरी : ………………………
उत्तरः
1. श्रवण : पितृभक्ति : : हरिश्चन्द्र : सच्चाई का पालन
2. माफी : क्षमा : : दंड : सज़ा
3. तिरंगा झंडा : राष्ट्रध्वज : : गांधीजी : राष्ट्रपिता
4. सच्चाई : सम्मान : : चोरी : डाकू
IV. स्त्रीलिंग शब्द लिखिए :
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V. बहुवचन शब्द लिखिए :
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VI. विलोम शब्द लिखिए :
1. आज़ाद x अहिंसा  ………….
2. धर्म x सही  …………
3. सत्य x अविश्वास  ……………
4. झूठ x गुलाम ………….
5. दिन x बेशर्म …………..
6. गलत x असत्य …………..
7. विश्वास x रात  …………….
8. शर्म x अधर्म …………
9. हिंसा x सच ………
उत्तरः
1. आज़ाद x अहिंसा  (गुलाम)
2. धर्म x सही  (अधर्म)
3. सत्य x अविश्वास  (असत्य)
4. झूठ x गुलाम (सच)
5. दिन x बेशर्म (रात)
6. गलत x असत्य (सही)
7. विश्वास x रात (अविश्वास)
8. शर्म x अधर्म (बेशर्म)
9. हिंसा x सच (अहिंसा)

VII, सही शब्द पहचानकर लिखिए :

1. पुरुष = ………. (आदमी, आत्मा, काम, पालन)
2. बुद्ध = ………. (बुद्धिमान, बालवान, निर्बल, मूर्ख)
3. कर्ज = ………. (काम, कम, ऋण, ऋषि)
4. सोना = ………. (चाँद, चाँदी, स्वर्ण, सवर्ण)
5. आँसू = ………. (अश्रु, आँधी, आस, आरजू)
उत्तरः
1. पुरुष = आदमी
2. बुद्ध = मूर्ख
3. कर्ज = ऋण
4. सोना = स्वर्ण
5. आँसू = अश्रु

VIII. प्रेरणार्थक शब्द लिखिए :
1. श्रवण : पितृभक्ति :

IX. सही अर्थवाले वाक्य बनाइए :

1. महान् पुरुष गांधी थे महात्मा
उत्तरः महात्मा गांधी महान् पुरुष थे।
2. वे नहीं कभी बोले झूठ
उत्तरः वे कभी झूठ नहीं बोले ।
3. गया मीना बुद्ध को मोहन
उत्तर: मोहन को बुदु माना गया ।
4. सोची माँगने बात की से पिता माफी
उत्तरः पिता से माफी माँगने की बात सोची
X. कन्नड या अंग्रेज़ी में अनुवाद कीजिए :
महात्मा गांधी 
महात्मा गांधी पाठ का सारांश:
सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के नक्शे कदम पर चलकर ही इस देश ने आजादी प्राप्त की थी। वे त्याग और तपस्या की मूर्ति थे। उन्होंने किसी को सताया नहीं और न ही झूठ बोले।
एक बार स्कूल का निरीक्षण करने आए एक अधिकारी ने गांधी से अंग्रेजी के पाँच शब्द लिखवाये। गांधी ने हिज्जे गलत लिखे। उनको ‘केटल’ शब्द लिखने को कहा था। अध्यापक ने गांधी को दूसरे छात्र से हिज्जे देखकर ठीक करने का इशारा किया। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। चोरी का रास्ता नहीं अपनाया।
‘श्रवण पितृभक्ति’ नाटक पढ़कर श्रवण और ‘हरिश्चन्द्र’ नाटक देखकर हरिश्चन्द्र जैसा बनने एवं सच्चाई का पालन करने का निश्चय किया। बचपन की इन आदतों ने ही गांधी को महात्मा और सत्य का पुजारी बनाया।
एक बार भाई का कर्ज चुकाने के लिए हाथ के कड़े से सोना काटकर बेचा था। गांधी को इस चोरी का दुःख हुआ लेकिन पिता को बताने की हिम्मत नहीं हुई। उन्होंने पिता को पत्र के माध्यम से इस बारे में सूचित किया। पिता की आँखें भर आयी। गांधीजी ने इस घटना के बाद हमेशा के लिए चोरी की आदत छोड़ दी। ऐसे थे सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी।
 
ಮಹಾತ್ಮ ಗಾಂಧಿ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ಸಾರಾಂಶ :

ಮಕ್ಕಳು ಮಹಾತ್ಮ ಗಾಂಧಿಯವರ ಸ್ವಭಾವದ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿಯುತ್ತಾರೆ ಮತ್ತು ಸತ್ಯ ಅಹಿಂಸ ಧರ್ಮದ ಬಗ್ಗೆ ದೃಢ ನಿಶ್ಚಯ ಮಾಡಲು ಪ್ರೇರಣೆ ಪಡೆಯುವರು. ಮಹಾತ್ಮ ಗಾಂಧೀಜಿ ಮಹಾನ್ ವ್ಯಕ್ತಿ .ಇಡೀ ದೇಶದಲ್ಲಿ ಇವರನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರಪಿತ ಎನ್ನುವರು .ಇವರ ಪ್ರಯತ್ನದಿಂದಲೇ ಭಾರತಕ್ಕೆ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ ಬಂದಿತು .ಅವರು ತ್ಯಾಗ ಮತ್ತು ತಪಸ್ಸಿನ ಮೂರ್ತಿಯಾಗಿದ್ದರು. ಧರ್ಮ ಅವರ ಪ್ರಾಣ ಮತ್ತು ಸತ್ಯ ಅವರ ಹತ್ಯ. ಬಾಲಕ ಮೋಹನದಾಸ ಕಾರಮಚಂದ್ರ ಗಾಂಧೀಜಿಯ ಸರಿಯಾದ ಸಮಯಕ್ಕೆ ಶಾಲೆಗೆ ಹೋಗುವರು ಮತ್ತು ಗಂಟೆ ಹೊಡೆದ ತಕ್ಷಣ ಮನೆಗೆ ಹೋಗುವರು .ಅವರು ಕೆಲಸದಿಂದ ಕೆಲಸ ಎನ್ನುವರು .ಯಾವಾಗಲೂ ಅವರು ಯಾರಿಗೆ ಕಿರುಕುಳ ನೀಡಿದವರಲ್ಲ ಯಾವಾಗಲೂ ಅವರು ಸುಳ್ಳು ಹೇಳಲಿಲ್ಲ.

ಒಂದು ದಿನದ ಒಂದು ದಿನದ ಮಾತು ಇದೆ ಶಿಕ್ಷಣದ ವಿಭಾಗದ ಅಧಿಕಾರಿಗಳು ಶಾಲೆಗೆ ವೀಕ್ಷಣೆಗೆ ಬಂದರು. ಅವರ ಇಂಗ್ಲಿಷ್ ನಲ್ಲಿ ಐದು ಶಬ್ದಗಳನ್ನು ಬರೆದರು. ಅವುಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದು ಸೆಲ್ಲಿಂಗ್ ಸೆಲ್ಲಿಂಗ್ ತಪ್ಪು ಇದ್ದ ಕಾರಣ ಅಧ್ಯಾಪಕರು ಗುರುತು ಮಾಡಿ ಪಕ್ಕದಲ್ಲಿದ್ದವರ ಬಳಿ ನೋಡಿ ಬರೆಯಲು ಹೇಳಿದರು. ಗಾಂಧೀಜಿ ಹಾಗೆ ಮಾಡಲಿಲ್ಲ. ಆಗ ಗಾಂಧೀಜಿಯವರನ್ನು ದಡ್ಡ ಎಂದರು .ಆದರೆ ಅವರಿಗೆ ಯಾವುದೇ ರೀತಿ ಅಸಹಾಯ ವೆನಿಸಲಿಲ್ಲ. ಅವರಿಗೆ ಈ ಮಾತಿನಲ್ಲಿ ತೃಪ್ತಿ ಸಿಕ್ಕಿತು .ಅವರಿಗೆ ಕಳ್ಳತನದ ದಾರಿ ಸರಿ ಎನಿಸಲಿಲ್ಲ .ಅವರ ಸತ್ಯ ನಿಷ್ಠೆ ಇಲ್ಲಿಂದಲೇ ಪ್ರಾರಂಭವಾಯಿತು ಎಲ್ಲರೂ ಮುಂದೆ ಮಹಾತ್ಮ ಎಂದರು.

ಶ್ರವಣಕುಮಾರ ಪಿತೃ ಭಕ್ತಿ ನಾಟಕವನ್ನು ಓದಿ ಅವರು ವಿಸ್ಮಯಗೊಂಡರು .ನಾನು ಶ್ರವಣಕ ಮಾಡಿದರು ಮುಂದಿನ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಕಳ್ಳತನ ಮಾಡುವುದಿಲ್ಲ ಎಂದು ತನ್ನ ತಂದೆಯ ಬಳ್ಳಿ ಕ್ಷಮೆ ಯಾಚಿಸಲು ನಿಶ್ಚಯ ಮಾಡಿದ್ದರು. ಆದರೆ ತನ್ನ ತಂದೆಯ ಬಳಿ ಹೋಗಲು ಧೈರ್ಯ ಬರಲಿಲ್ಲ. ಹಾಗಾಗಿ ಎಲ್ಲ ವಿಷಯವನ್ನು ಪತ್ರದಲ್ಲಿ ಬರೆದು. ಗಾಂಧೀಜಿ ತಂದೆಯ ಬಳಿ ಕ್ಷಮೆ ಕೇಳಿದರು ಪತ್ರ ಓದಿದ ತಂದೆಯ ಕಣ್ಣಿನಲ್ಲಿ ನೀರು ಹರಿಯಿತು. ಗಾಂಧೀಜಿ ಮುಂದಿನ ದಿನಗಳಿಗಾಗಿ ಕಳ್ಳತನ ಮಾಡುವ ಹವ್ಯಾಸ ಬಿಟ್ಟರು. ತಂದೆಯ ಕಣ್ಣೀರು ನೋಡಿ ಗಾಂಧೀಜಿಗೆ ನಮ್ಮ ತಂದೆ ನನ್ನನ್ನು ಕ್ಷಮಿಸಿದ್ದರು ಎಂದರು. ಅಹಿಂಸಾ, ಸತ್ಯ ,ಮತ್ತು ಧರ್ಮದ ನಿಶ್ಚಯ ಗಾಂಧೀಜಿಯವರನ್ನು ಮಹಾತ್ಮನನ್ನಾಗಿಸಿದ್ದು.

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